वरदान

February 6, 2008

मुँशी प्रेमचँद की कहानी

विन्घ्याचल पर्वत मध्यरात्रि के निविड़ अन्धकार में काल देव की भांति खड़ा था। उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत पताकाएं वायु की मन्द-मन्द तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था।

अर्धरात्रि व्यतीत हो चुकी थी। चारों और भयावह सन्नाटा छाया हुआ था। गंगाजी की काली तरंगें पर्वत के नीचे सुखद प्रवाह से बह रही थीं। उनके बहाव से एक मनोरंजक राग की ध्वनि निकल रही थी। ठौर-ठौर नावों पर और किनारों के आस-पास मल्लाहों के चूल्हों की आंच दिखायी देती थी। ऐसे समय में एक श्वेत वस्त्रधारिणी स्त्री अष्टभुजा देवी के सम्मुख हाथ बांधे बैठी हुई थी। उसका प्रौढ़ मुखमण्डल पीला था और भावों से कुलीनता प्रकट होती थी। उसने देर तक सिर झुकाये रहने के पश्चात कहा।

‘माता! आज बीस वर्ष से कोई मंगलवार ऐसा नहीं गया जबकि मैंने तुम्हारे चरणो पर सिर न झुकाया हो। एक दिन भी ऐसा नहीं गया जबकि मैंने तुम्हारे चरणों का ध्यान न किया हो। तुम जगतारिणी महारानी हो। तुम्हारी इतनी सेवा करने पर भी मेरे मन की अभिलाषा पूरी न हुई। मैं तुम्हें छोड़कर कहां जाऊ?’

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हार की जीत

February 6, 2008

सुदर्शन की कहानी

माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद्-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान। उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे ‘सुल्तान’ कह कर पुकारते, अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और देख-देखकर प्रसन्न होते थे। उन्होंने रूपया, माल, असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था, यहाँ तक कि उन्हें नगर के जीवन से भी घृणा थी। अब गाँव से बाहर एक छोटे-से मन्दिर में रहते और भगवान का भजन करते थे। “मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकूँगा”, उन्हें ऐसी भ्रान्ति सी हो गई थी। वे उसकी चाल पर लट्टू थे। कहते, “ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो।” जब तक संध्या समय सुलतान पर चढ़कर आठ-दस मील का चक्कर न लगा लेते, उन्हें चैन न आता।

खड़गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। होते-होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। उसका हृदय उसे देखने के लिए अधीर हो उठा। वह एक दिन दोपहर के समय बाबा भारती के पास पहुँचा और नमस्कार करके बैठ गया। बाबा भारती ने पूछा, “खडगसिंह, क्या हाल है?”

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काबुलीवाला

February 6, 2008

रवीनद्रनाथ ठाकुर की कहानी

मेरी पाँच बरस की लड़की मिनी से घड़ीभर भी बोले बिना नहीं रहा जाता। एक दिन वह सवेरे-सवेरे ही बोली, “बाबूजी, रामदयाल दरबान है न, वह ‘काक’ को ‘कौआ’ कहता है। वह कुछ जानता नहीं न, बाबूजी।” मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने दूसरी बात छेड़ दी। “देखो, बाबूजी, भोला कहता है – आकाश में हाथी सूँड से पानी फेंकता है, इसी से वर्षा होती है। अच्छा बाबूजी, भोला झूठ बोलता है, है न?” और फिर वह खेल में लग गई।

मेरा घर सड़क के किनारे है। एक दिन मिनी मेरे कमरे में खेल रही थी। अचानक वह खेल छोड़कर खिड़की के पास दौड़ी गई और बड़े ज़ोर से चिल्लाने लगी, “काबुलीवाले, ओ काबुलीवाले!” Read the rest of this entry »


अध्यक्ष महोदय श्री अनंत पदमनाभ प्राध्यापक

December 19, 2007

समारोह के अत्तिथि महोदय श्री अनंत्तपदमनाठद्वारा ठ??षण


हिन्दी दिवस समारोह

December 19, 2007

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दूसरा परीक्षा २००७-०८ कक्षा : दस

September 13, 2007

खंड ’कप्रश्न १ निम्नलिखित गद्यांश को पढकर संबंधित प्रश्नों का उत्तर दीजिए ।                   

   आज जब सारी दुनिया में गए भारतीय अपने मातृदेश की ओर देख रहे हैं और चाहते हैं कि अपने देश , भाषा और संस्कृति के साथ-साथ जुडावा और प्रगाढ हो तो ब्रिटेन के भारतीय इस स्थिति से अपने को अलग कैसे रख सकते हैं । भारत के ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं । इसके चलते भारतीय मूल के लोग बडी संख्या में ब्रिटेन में हैं । यहाँ तक कई नगरों में वे बहुसंख्या हो गए हैं जैसे लेस्ट्र में । उनके सामने सवाल यह था कि अपनी भाषा को बनाए जाए और अगली पीढी को अपनी विरासत सौंपी जाए        जहाँ तक हिन्दी की स्थिति है,आज से लगभग १४ वर्ष पूर्व किए गए अपने हिंदी सम्बंधी सर्वेक्षण में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सत्येंदर श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया था कि हिंदी का अपना कोई क्षेत्र या सीमा नहीं है अर्थात हिंदी के लोग किसी क्षेत्र विशेष में नहीं रहते जैसे कि गुजराती , पंजाबी या बंगला भाषी , परंतु हिंदी भाषियों में अपनी भाषा को साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र में जीवंत रखने की ललक दिखाई देती है ।      

 हिंदी एक संपर्क भाषा के रुप में भारत में भी इस्तेमाल की जाती है और विदेश में रहनेवाले भारतीय भी आपसी आत्मीय बातचीत के लिए हिंदी का इस्तेमाल करते हैं । ब्रिटेन में पाकिस्तानी भी बडी सम्ख्या में हैं । वे आपस में बातचीत में उर्दू का प्रयोग करते है जो बोलचाल की भाषा की दृष्टि से हिंदी से भिन्न नहीं हैं । अत: बोलचाल दृष्टि से पंजाबी,गुजराती,बंगाली,दक्षिण भारतीय और दक्षिण एशिया से आए लोग हिंदी का ही संपर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल करते है ।                                     

  १) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखें ।                                   ०१

२) ब्रिटेन के भारतीयों के सामने कौन-सा सवाल खडा था ?                       ०१

३) ब्रिटेन में हिंदीभाषियों की क्या स्थिति है ?                                  ०१

४) विदेशों में हिंदी को किस रूप में प्रयुक्त किया जाता है ?                        ०१

५) जिवंत और भारतीय के विलोम शब्द लिखिए ।                              ०१

६) आज विदेशों में गए भारतीय किस देश की ओर निहार रहे हैं और क्यों ?          ०२

७) ब्रिटेन में भारतीयों की स्थिति पर प्रकाश डालिए ।                     ०२

खंड ’ ख

प्रश्न २ आप संजय बी शेट्टी, आदर्श निलय ,अंबल पाडी रोड – उडुपि-५६७२३३ से स्वास्थ्य-अधिकारी को अपने गली-मुहल्ले की गंदगी के बारे में पत्र लिखिए ।                  ०५

प्रश्न ३ निम्नलिखित विषय पर संकेत – बिंदुओं के आधार पर ८०-१०० शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए ।                                                  

मेरे जीवन का लक्ष्य१) जीवन में लक्ष्य की आवश्यकता

२) मेरा लक्ष्य- पत्रकार बनना ३) मेरी प्रेरणा के आधार ४) सजग पत्रकार बनने का लक्ष्य  ५) मेरे प्रयास  .

खंड ’ ग ’

प्रश्न ३ सूचना के अनुसार लिखिए ।

१) ’ विद्यालय ’ और  परोपकार ’ का संधि विच्छेद कीजिए ।                      ०२

२) ’ कला-मर्मज्ञ ’ और  राष्ट्रपति ’ समास का विग्रह कीजिए ।                    ०२

३) ’ निर ’ उपसर्ग से एक शब्द बनाइए ।                                    ०१

४) ’ गार ’ प्रत्यय से एक शब्द बनाइए ।                                     ०१

५) ’ चक्कर खा जाना ’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए ।              ०१

खंड ’ घ ’

प्रश्न ४ निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,   मरो,परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी ।हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,   मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए ।वही पशु-प्रवृति है कि आप आप ही चरे ,   वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।

१) कवि तथा कविता का नाम लिखिए ।                                      ०१

२) कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है ?                                    ०१

३) ’पशु-प्रवृति ’ किसे कहा है ?                                            ०१

४) अर्थ स्पष्ट कीजिए ।                                                   ०२

प्रश्न ५ निम्नलिखित गद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।तुम सही कहते हो। जनरल सहाब के सभी कुत्ते मँहगे और अच्छी नस्ल के हैं, और यह – जरा इस पर नजर तो दौडाओ । कितना भद्दा और मरियल – सा पिल्ला है । कोई सभ्य आदमी ऐसा कुत्ता काहे को पालेगा ? तुम लोगों का दिमाग खराब तो नहीं हो गया है । यदी इस तरह का कुत्ता माँस्को या पीटर्सवर्ग में दिख जाता , तो मालूम हो उसका क्या हश्र होता ? तब कानून की परवाह किए बगैर इसकी छुट्टी कर दी जाती ।

१) कहानी और लेखक का नाम लिखिए ।                                     ०१

२) इस कथन का वक्ता कौन है ?                                           ०१

) ओचुमेलाँव किस बात को सही कहता है ?                                  ०१

४) ओचुमेलाँव काठगोदाम में काटने वाले कुत्ते के बारे में क्या धारणा रखता है?         ०२

प्रश्न ५ निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लिखिए ।                                 

१) तिसरी कसम फिल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है? ०१

२) कुत्ता क्यों किकिया रहा था?                                             ०१

३) स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण ’आदमी ’फौजी  जवान क्यों समझने लगता था ?                                                 ०२


तीसरा चक्र परीक्षा २००७-०८ कक्षा :सात

September 12, 2007

प्रश्न १ सूचना के अनुसार लिखिए ।

१) समनार्थी शब्द लिखिए ।   १) अजीब   २) चंचल ०2

२) विलोम शब्द लिखिए ।     १) बडा          २) पति                    ०२

३) वर्तनी शुद्ध कीजिए ।  १) सूंदर    २) कार्या                    ०२

४) संधि विच्छेद किजिए।      १) सूर्योदय  २) मेघालय                  ०२

५) ’उप ’ उपसर्ग से दो शब्द बनाइए ।                                ०२

६) संधि कीजिए        १) गिरि+ईश २) यदि+अपि                     ०२

७) लिंग बदलिए ।           १) बालक   २) लेखक                   ०२

८) वचन बदलिए ।      १) खिडकी २) बच्चा                   ०२

९) वाक्य में प्रयोग कीजिए ।   १) धीरे-धीरे २) शरीर                    ०२

१०) इन वाक्यों को प्रश्नवाचक वाक्य बनाईए ।                           ०२  

१) ज्ञान असीमित है ।   २) राष्ट्रीयता की चिनगारी जल उठी थी ।  

प्रश्न २ निम्नलिखित गद्य भाग को पढकर प्रश्नों के उत्तर दिजिए ।     मोक्षागुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म मैसूर के मुद्देनाहल्ली नामक स्थान पर १५ सितंबर १८६१ को हुआ था । उनके पिता वैद्य थे । वर्षों पहले उनके पूर्वज आंध्र प्रदेश के मोक्षागुंडम से यहाँ आए और मैसूर में बस गए थे।

१) पाठ का नाम लिखिए ।                                          ०१

२) विश्वेश्वरैया का जन्म कहाँ हुआ था ?                                ०१

३) विश्वेश्वरैया का जन्म कब हुआ था ?                                ०१

४) मोक्षागुंडम कहाँ है ?                                       ०१

५) विश्वेश्वरैया के पिता क्या थे ?                                     ०१

प्रश्न ३ निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

१) सी ह्यांग ती के समय में पुस्तकें कैसे बनाई जाती थीं ?                 ०२

 २) किताबों को सुरक्षित रखने के लिए तुम क्या करते हो ?                ०२

३) मिनी की काबुलीवाले से मित्रता क्यों हो गई ?                       ०२

४) वर्षों बाद मिनी के पिता ने काबुलेवाले को उसकी किस बात से पहचान लिया ? ०२

५) विश्वेश्वरैया के मन में कौन-कौन से सवाल उठते थे ?                  ०२

प्रश्न ४ किताबों की आवश्यकता इस विषय पर एक संक्षिप्त में निबंध लिखिए । ०५


ठंडे मौसम में गपा मारते बैठे बे घरदार बुजुर्गों का एक दृष्य ।

August 23, 2007

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नविन पाठ्यक्रम पर एक प्रतिवेदन

August 23, 2007

नविन पाठ्यक्रम पर एक प्रतिवेदन

राष्ट्रीय शैक्षक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा आयोजित नविन पाठ्यक्रम पर चर्चा कार्यक्रम में दिनांक ९-८-२००७ को क्षेत्रिय शिक्षा संस्थान मैसूर में भाग लिया गया है । इसके शिलशिले में एक सक्षिप्त प्रतिवेदन निम्न प्रकार है ।

     सर्वप्रथम पर्तिभागियों को कार्यक्रम की जानकारी देते हुए पूरे दिन के कार्यक्रम की समय सारणी की एक प्रति दी गई । सभा ठीक १० बजे निम्नलिखित सदस्यों के नेतॄत्व में शुरु हुई ।

१) श्रीमान प्रमोद कुमार २) श्रीमती नूतन झाँ ३) श्री प्रेमपाल शर्मा ४) श्रीमती नीरजा शर्मा पाठ्यक्रम के सदस्य थे । श्रीमान प्रमोद कुमार भाषा की महत्व बताते हुए प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज कल अध्यापको को यह बात ध्यान देना चाहिए कि वे हिंदी भाषा पर अधिक जोर दे । भाषा के प्रति छात्रों को आकर्षित करना चाहिए । नविन पाठ्यक्रम में दिए गए पाठ छात्रों के स्तरीय है । प्रश्न अभ्यास में  छात्रों को अनुमान और कल्पना के प्रश्न पूछे गए है, जो अपने आस-पास के परिवेश से जुडे हुए घटनाओं से है और छात्र अपने विचार से लिख पाते है । छात्रों की क्षमता और विचार शक्ति को अपने परिवेश से जोडने की कोशिश की गई है । श्रीमती नूतन झाँ का कह्ना था कि नविन पाठयक्रम छात्रों को अपने आस-पास के परिवेश में झाँकर देखने की क्षमता उतपन्न करता है । श्री प्रेमपाल शर्मा का विचार था कि पाठय्पुस्तक केवल परीक्षा की दृष्टि से नहीं बनाई गई । छात्र पाठ के आधार पर बाहरी दुनिया को जान सके । श्रीमती नीरजा शर्मा ने अपना राह सुझायी कि पाठ पुस्तक रंगिन और चित्रमय है जो कि बच्चों के लिए आकर्षित है ।

     अधिक से अधिक चर्चा वसंत भाग २ हिन्दी ए कोर्स पर हुई । कई ऐसे पर्श्न पूछे गए जो अध्यापकों के मन शंकित थी । दूर्वा भाग २ पर कोई विशेष चर्चा नही हुई । जब मुझे एक मौका मिला तो व्याकरण संबंधि एक प्रश्न पूछा ।  राष्ट्रीय शैक्षक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के सभा के सदस्यों से कोई जवाब नहीं मिला । ठीक सभा के कार्यक्रम पाँच बजे समप्त हुआ ।


तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

August 23, 2007

पाठ योजना

कक्षा : दसमं

दिनांक :१८ जुलाई २००७ से ३१ जुलाई २००७ तक

पाठ का नाम : तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

शैक्षणिक उद्देश्य :-

१ सामान्य उद्देश्य :

) छात्रों में गद्य पाठ के प्रति  अभीरुचि उत्पन्न करना ।

) छात्रों में विचाराभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना ।

) छात्रों में शब्द भंडार में वृद्धि करना ।

४) विद्यार्थी के व्याकरणिक ज्ञान में गहनता और शुद्धता लाना ।

२ विशिष्ट उद्देश्य :

) छात्रों को फिल्मी दुनिया के जगत के मनोभावना से परिचित कराना।

) छात्रों को सेल्यूलाइड पर लिखी हुई कविता की भावना का विकास करना ।

) छात्रों में प्राचीन फिल्म और आधुनिक फिल्म के अंतर को समझने की भावना को उत्पन्न कराना ।

) छात्रों को तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र के संवेदनशिल और भावनात्मक मन से आवगत कराना ।

) छात्रों को समास पद और अनेकार्थी शब्दों से आवगत कराना ।

३ सहायक सामग्री :

निर्धारित पुस्तकें स्पर्श भाग २ तथा पाठ को कंप्यूटर द्वारा फिल्म तीसरी कसम को दिखाना , शामपट चाँक एंव चार्ट आदि ।

४ प्रस्तुतीकरण :

प्रस्तुत पाठ में अध्यापक विद्यार्थियों को समझाते है कि तीसरी कसम के शिल्पकार

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