दूसरा इकाई परीक्षा कक्षा सात

जवाहर नवोदय विद्यालय उडुपि

दूसरा चक्र परीक्षा २००९-१०

कक्षा :सात                                                                                             विषय :हिंदी

समय :१ घण्टा                                                                                        दिनांक :

प्रश्न १ निम्नलिखित गद्यांश को पढक्र पूछेगए सवालों का जवाब दीजिए ।

            समाचार पत्र तो तुमने देखा ही होगा । इसे देखकर, घटनाओं को जानकर तथा लेखों को पढकर मन की जिज्ञासा शांत हो जाती है । ऐसा जान पडता है मनो सारी दुनिया से हमारा संबंध जुड गया है । दुनिया से संबंध जोडने वाले इस समाचार पत्र की कहानी लगभग ४०० वर्ष पुरानी है ।

            प्राचीनकाल में एक स्थान से दूसरे स्थान तक समाचार पहुँचाने में कई दिन लग जाते थे । तब समाचार यात्रियों द्वारा ही पहुँचते थे । राजा-महाराजाओं के निजी संदेशवाहक होते थे । लाठी में घुँघरु बाँधे जब कोई संदेशवाहक दौडा आता तो लोग उसके लिए रास्ता छोड देते थे । शीघ्र समाचार पहुँचाने के लिए घोडों का प्रयोग किया जाता था । कबतोरों द्वारा भी संदेश भेजा जाते थे । आज ऐसी स्थिति नहीं है । संसार के किसी भी कोने में कोई घटना घटती है तो लोगों को उसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है । इसके कई साधन है –समाचार पत्र , रेडियो , फोन , दूरदर्शन , इंटरनेट आदि । रेडियो और दूरदर्शन द्वारा हमें शीघ्र ही समाचार प्राप्त होते हैं । समाचार पत्र में हमें देश – विदेश की खबरे ,बाजार-भाव, नौकरी , सिनेमा , मौसम , खेलकुद ,विज्ञापन आदि ।

१) इस गद्यांश को उचीत शिर्षक दीजिए ।                                                              ०१

२) दुनिया से संबंध जोडने समाचार पत्र की कहानी कितने वर्ष पुरानी है ?      ०१

३) मन की जिज्ञासा कैसे शांत हो जाती है ?                                                            ०२

४) संदेशवाहक कैसे दौडा आता और लोग क्या करते थे ?                                         ०२

५) समाचार पत्र में क्या – क्या खबर छपती है ?                                                     ०२

६) समाचार पत्र के कौन-कौन से साधन है ?         Read the rest of this entry »

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हिन्दी पाठयोजना गारो कक्षा सात

पाठ योजना

कक्षा : सात

दिनांक :१८ जुलाई २००९ से ३१ जुलाई २००९ तक

पाठ का नाम : गारो ।

शैक्षणिक उद्देश्य :-

१ सामान्य उद्देश्य :

१) छात्रों में गद्य पाठ के प्रति  अभीरुचि उत्पन्न करना ।

२) छात्रों में विचाराभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना ।

३) छात्रों में शब्द भंडार में वृद्धि करना ।

४) विद्यार्थी के व्याकरणिक ज्ञान में गहनता और शुद्धता लाना ।

२ विशिष्ट उद्देश्य :

१) छात्रों को आदीवासी दुनिया के जगत के मनोभावना से परिचित कराना।

२) छात्रों को सामाज की स्थिति पर लिखी हुई गद्य पाठ की विचार शक्ति का विकास कराना ।

३) छात्रों में प्राचीन जनजातीयों के अंतर को समझने की भावना को उत्पन्न कराना ।

४) छात्रों को गारो समाज के समस्यायों के में आवगत कराना ।

५) छात्रों को संधि,अनेकार्थी शब्दों से आवगत कराना ।

३ सहायक सामग्री :

निर्धारित पुस्तकें हमारी हिंदी भाग २, कंप्यूटर में पाठ योजना को दिखाना , शामपट चाँक एंव चार्ट आदि ।

४ प्रस्तुतीकरण :

प्रस्तुत पाठ में अध्यापक विद्यार्थियों को समझाते है कि गारो एक समाज है और इस समाज के दो प्रमुख जनजाती के माहान व्यक्ति थे जा पा जलिन पा और सुख पा भुंगिपा । ये आदिवासी लोग मेघालय के आस-पास रहते थे । इन समाज की एक कथा है कोई राजा इन समाज के एक सुंदर लडकी से एक राजा शादी कर ली थी । पहले ये लोग जंगल में रहते थे । इनका भोजन जंगल की झडीबुटियाँ होती थी । जहाँ नदी और अनाज का प्रबंध होता था , वहाँ ये लोग कई महिनों तक रहा करते थे । इनका मुख्य धंधा होता था पशु पालन । ये लोग शिकार के शौकिन माने जाते थे । बडे से बडे प्रणियों का शिकार आसान से कर लेते थे । अब ये लोग समतल भूमी पर अपना खेती का काम कर रहे हैं । राजा को अपनी समाज की लडकी देने के बाद अपना घरदार बसा लिए हैं।

५ कठिन शब्दार्थ :

घना= भयंकर जंगल, तट=किनारा, झडीबुटियाँ=जंगल के पेड पौधे , अपार=असीम , संकेत= ईशारा अभाव= कमी आदि।

६ विद्यार्थी – क्रियाएँ :

१) आदर्श वाचन को सुनकर तथा अनुकरण वाचन के द्वारा गारो पाठ का अर्थ ग्रहण करेंगे ।

२) शामपट पर देखकर विभिन्न शब्दों के अर्थ तथा पर्यावाची शब्दों के अर्थों के उदाहरण लिखेंगे ।

३) जिज्ञासा समाधान हेतु प्रश्न पूछ सकते है ।

४) दिए गए अभ्यास कार्य तथा गृहकार्य को पूर्ण करेंगे ।

५) गद्य पाठ को भाव को अपने शब्दों में लिख सकेंगे ।

७ मूल्यांकन :

१) गारो पाठ को मौखिक रूप द्वारा पूछकर ।

२) जा पा जलिन पा और सुख पा भुंगी पा के व्यक्तित्व के बारे में पूछकर ।

३) कठिन शब्दों के अर्थ पूछकर ।

४) चक्र परीक्षा द्वारा ।

५) लिखित गृह कार्य जाँच द्वारा ।

८ गृहकार्य :

 चेहरा मुरझाना , चक्कर खा जाना , दो से चार बनना और आँखो से बोलना मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।

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गणेश चौतुर्थी के दिन नवोदय विद्यालय में हर्षोल्लास

गणेश चौतुर्थी के दिन नवोदय विद्यालय में हर्षोल्लास

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वरदान

मुँशी प्रेमचँद की कहानी

विन्घ्याचल पर्वत मध्यरात्रि के निविड़ अन्धकार में काल देव की भांति खड़ा था। उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत पताकाएं वायु की मन्द-मन्द तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था।

अर्धरात्रि व्यतीत हो चुकी थी। चारों और भयावह सन्नाटा छाया हुआ था। गंगाजी की काली तरंगें पर्वत के नीचे सुखद प्रवाह से बह रही थीं। उनके बहाव से एक मनोरंजक राग की ध्वनि निकल रही थी। ठौर-ठौर नावों पर और किनारों के आस-पास मल्लाहों के चूल्हों की आंच दिखायी देती थी। ऐसे समय में एक श्वेत वस्त्रधारिणी स्त्री अष्टभुजा देवी के सम्मुख हाथ बांधे बैठी हुई थी। उसका प्रौढ़ मुखमण्डल पीला था और भावों से कुलीनता प्रकट होती थी। उसने देर तक सिर झुकाये रहने के पश्चात कहा।

‘माता! आज बीस वर्ष से कोई मंगलवार ऐसा नहीं गया जबकि मैंने तुम्हारे चरणो पर सिर न झुकाया हो। एक दिन भी ऐसा नहीं गया जबकि मैंने तुम्हारे चरणों का ध्यान न किया हो। तुम जगतारिणी महारानी हो। तुम्हारी इतनी सेवा करने पर भी मेरे मन की अभिलाषा पूरी न हुई। मैं तुम्हें छोड़कर कहां जाऊ?’ Read the rest of this entry »

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हार की जीत

सुदर्शन की कहानी

माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद्-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान। उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे ‘सुल्तान’ कह कर पुकारते, अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और देख-देखकर प्रसन्न होते थे। उन्होंने रूपया, माल, असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था, यहाँ तक कि उन्हें नगर के जीवन से भी घृणा थी। अब गाँव से बाहर एक छोटे-से मन्दिर में रहते और भगवान का भजन करते थे। “मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकूँगा”, उन्हें ऐसी भ्रान्ति सी हो गई थी। वे उसकी चाल पर लट्टू थे। कहते, “ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो।” जब तक संध्या समय सुलतान पर चढ़कर आठ-दस मील का चक्कर न लगा लेते, उन्हें चैन न आता।

खड़गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। होते-होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। उसका हृदय उसे देखने के लिए अधीर हो उठा। वह एक दिन दोपहर के समय बाबा भारती के पास पहुँचा और नमस्कार करके बैठ गया। बाबा भारती ने पूछा, “खडगसिंह, क्या हाल है?” Read the rest of this entry »

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काबुलीवाला

रवीनद्रनाथ ठाकुर की कहानी

मेरी पाँच बरस की लड़की मिनी से घड़ीभर भी बोले बिना नहीं रहा जाता। एक दिन वह सवेरे-सवेरे ही बोली, “बाबूजी, रामदयाल दरबान है न, वह ‘काक’ को ‘कौआ’ कहता है। वह कुछ जानता नहीं न, बाबूजी।” मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने दूसरी बात छेड़ दी। “देखो, बाबूजी, भोला कहता है – आकाश में हाथी सूँड से पानी फेंकता है, इसी से वर्षा होती है। अच्छा बाबूजी, भोला झूठ बोलता है, है न?” और फिर वह खेल में लग गई।

मेरा घर सड़क के किनारे है। एक दिन मिनी मेरे कमरे में खेल रही थी। अचानक वह खेल छोड़कर खिड़की के पास दौड़ी गई और बड़े ज़ोर से चिल्लाने लगी, “काबुलीवाले, ओ काबुलीवाले!” Read the rest of this entry »

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अध्यक्ष महोदय श्री अनंत पदमनाभ प्राध्यापक

समारोह के अत्तिथि महोदय श्री अनंत्तपदमनाठद्वारा ठ??षण

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हिन्दी दिवस समारोह

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दूसरा परीक्षा २००७-०८ कक्षा : दस

खंड ’कप्रश्न १ निम्नलिखित गद्यांश को पढकर संबंधित प्रश्नों का उत्तर दीजिए ।                   

   आज जब सारी दुनिया में गए भारतीय अपने मातृदेश की ओर देख रहे हैं और चाहते हैं कि अपने देश , भाषा और संस्कृति के साथ-साथ जुडावा और प्रगाढ हो तो ब्रिटेन के भारतीय इस स्थिति से अपने को अलग कैसे रख सकते हैं । भारत के ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं । इसके चलते भारतीय मूल के लोग बडी संख्या में ब्रिटेन में हैं । यहाँ तक कई नगरों में वे बहुसंख्या हो गए हैं जैसे लेस्ट्र में । उनके सामने सवाल यह था कि अपनी भाषा को बनाए जाए और अगली पीढी को अपनी विरासत सौंपी जाए        जहाँ तक हिन्दी की स्थिति है,आज से लगभग १४ वर्ष पूर्व किए गए अपने हिंदी सम्बंधी सर्वेक्षण में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सत्येंदर श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया था कि हिंदी का अपना कोई क्षेत्र या सीमा नहीं है अर्थात हिंदी के लोग किसी क्षेत्र विशेष में नहीं रहते जैसे कि गुजराती , पंजाबी या बंगला भाषी , परंतु हिंदी भाषियों में अपनी भाषा को साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र में जीवंत रखने की ललक दिखाई देती है ।      

 हिंदी एक संपर्क भाषा के रुप में भारत में भी इस्तेमाल की जाती है और विदेश में रहनेवाले भारतीय भी आपसी आत्मीय बातचीत के लिए हिंदी का इस्तेमाल करते हैं । ब्रिटेन में पाकिस्तानी भी बडी सम्ख्या में हैं । वे आपस में बातचीत में उर्दू का प्रयोग करते है जो बोलचाल की भाषा की दृष्टि से हिंदी से भिन्न नहीं हैं । अत: बोलचाल दृष्टि से पंजाबी,गुजराती,बंगाली,दक्षिण भारतीय और दक्षिण एशिया से आए लोग हिंदी का ही संपर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल करते है ।                                     

  १) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखें ।                                   ०१

२) ब्रिटेन के भारतीयों के सामने कौन-सा सवाल खडा था ?                       ०१

३) ब्रिटेन में हिंदीभाषियों की क्या स्थिति है ?                                  ०१

४) विदेशों में हिंदी को किस रूप में प्रयुक्त किया जाता है ?                        ०१

५) जिवंत और भारतीय के विलोम शब्द लिखिए ।                              ०१

६) आज विदेशों में गए भारतीय किस देश की ओर निहार रहे हैं और क्यों ?          ०२

७) ब्रिटेन में भारतीयों की स्थिति पर प्रकाश डालिए ।                     ०२

खंड ’ ख

प्रश्न २ आप संजय बी शेट्टी, आदर्श निलय ,अंबल पाडी रोड – उडुपि-५६७२३३ से स्वास्थ्य-अधिकारी को अपने गली-मुहल्ले की गंदगी के बारे में पत्र लिखिए ।                  ०५

प्रश्न ३ निम्नलिखित विषय पर संकेत – बिंदुओं के आधार पर ८०-१०० शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए ।                                                  

मेरे जीवन का लक्ष्य१) जीवन में लक्ष्य की आवश्यकता

२) मेरा लक्ष्य- पत्रकार बनना ३) मेरी प्रेरणा के आधार ४) सजग पत्रकार बनने का लक्ष्य  ५) मेरे प्रयास  .

खंड ’ ग ’

प्रश्न ३ सूचना के अनुसार लिखिए ।

१) ’ विद्यालय ’ और  परोपकार ’ का संधि विच्छेद कीजिए ।                      ०२

२) ’ कला-मर्मज्ञ ’ और  राष्ट्रपति ’ समास का विग्रह कीजिए ।                    ०२

३) ’ निर ’ उपसर्ग से एक शब्द बनाइए ।                                    ०१

४) ’ गार ’ प्रत्यय से एक शब्द बनाइए ।                                     ०१

५) ’ चक्कर खा जाना ’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए ।              ०१

खंड ’ घ ’

प्रश्न ४ निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,   मरो,परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी ।हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,   मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए ।वही पशु-प्रवृति है कि आप आप ही चरे ,   वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।

१) कवि तथा कविता का नाम लिखिए ।                                      ०१

२) कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है ?                                    ०१

३) ’पशु-प्रवृति ’ किसे कहा है ?                                            ०१

४) अर्थ स्पष्ट कीजिए ।                                                   ०२

प्रश्न ५ निम्नलिखित गद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।तुम सही कहते हो। जनरल सहाब के सभी कुत्ते मँहगे और अच्छी नस्ल के हैं, और यह – जरा इस पर नजर तो दौडाओ । कितना भद्दा और मरियल – सा पिल्ला है । कोई सभ्य आदमी ऐसा कुत्ता काहे को पालेगा ? तुम लोगों का दिमाग खराब तो नहीं हो गया है । यदी इस तरह का कुत्ता माँस्को या पीटर्सवर्ग में दिख जाता , तो मालूम हो उसका क्या हश्र होता ? तब कानून की परवाह किए बगैर इसकी छुट्टी कर दी जाती ।

१) कहानी और लेखक का नाम लिखिए ।                                     ०१

२) इस कथन का वक्ता कौन है ?                                           ०१

) ओचुमेलाँव किस बात को सही कहता है ?                                  ०१

४) ओचुमेलाँव काठगोदाम में काटने वाले कुत्ते के बारे में क्या धारणा रखता है?         ०२

प्रश्न ५ निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लिखिए ।                                 

१) तिसरी कसम फिल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है? ०१

२) कुत्ता क्यों किकिया रहा था?                                             ०१

३) स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण ’आदमी ’फौजी  जवान क्यों समझने लगता था ?                                                 ०२

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तीसरा चक्र परीक्षा २००७-०८ कक्षा :सात

प्रश्न १ सूचना के अनुसार लिखिए ।

१) समनार्थी शब्द लिखिए ।   १) अजीब   २) चंचल ०2

२) विलोम शब्द लिखिए ।     १) बडा          २) पति                    ०२

३) वर्तनी शुद्ध कीजिए ।  १) सूंदर    २) कार्या                    ०२

४) संधि विच्छेद किजिए।      १) सूर्योदय  २) मेघालय                  ०२

५) ’उप ’ उपसर्ग से दो शब्द बनाइए ।                                ०२

६) संधि कीजिए        १) गिरि+ईश २) यदि+अपि                     ०२

७) लिंग बदलिए ।           १) बालक   २) लेखक                   ०२

८) वचन बदलिए ।      १) खिडकी २) बच्चा                   ०२

९) वाक्य में प्रयोग कीजिए ।   १) धीरे-धीरे २) शरीर                    ०२

१०) इन वाक्यों को प्रश्नवाचक वाक्य बनाईए ।                           ०२  

१) ज्ञान असीमित है ।   २) राष्ट्रीयता की चिनगारी जल उठी थी ।  

प्रश्न २ निम्नलिखित गद्य भाग को पढकर प्रश्नों के उत्तर दिजिए ।     मोक्षागुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म मैसूर के मुद्देनाहल्ली नामक स्थान पर १५ सितंबर १८६१ को हुआ था । उनके पिता वैद्य थे । वर्षों पहले उनके पूर्वज आंध्र प्रदेश के मोक्षागुंडम से यहाँ आए और मैसूर में बस गए थे।

१) पाठ का नाम लिखिए ।                                          ०१

२) विश्वेश्वरैया का जन्म कहाँ हुआ था ?                                ०१

३) विश्वेश्वरैया का जन्म कब हुआ था ?                                ०१

४) मोक्षागुंडम कहाँ है ?                                       ०१

५) विश्वेश्वरैया के पिता क्या थे ?                                     ०१

प्रश्न ३ निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

१) सी ह्यांग ती के समय में पुस्तकें कैसे बनाई जाती थीं ?                 ०२

 २) किताबों को सुरक्षित रखने के लिए तुम क्या करते हो ?                ०२

३) मिनी की काबुलीवाले से मित्रता क्यों हो गई ?                       ०२

४) वर्षों बाद मिनी के पिता ने काबुलेवाले को उसकी किस बात से पहचान लिया ? ०२

५) विश्वेश्वरैया के मन में कौन-कौन से सवाल उठते थे ?                  ०२

प्रश्न ४ किताबों की आवश्यकता इस विषय पर एक संक्षिप्त में निबंध लिखिए । ०५

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