नवोदय विद्यालय अध्यापकों के लिए पाठ योजना कक्षा दस (मीरा के पद)

  

पाठ योजना

कक्षा : दसमं

दिनांक :27 जून 2007 से 30 जून 2007

पाठ का नाम : मीरा के पद ।

शैक्षणिक उद्देश्य :-

१ सामान्य उद्देश्य :

१) छात्रों में काव्य के प्रति रुचि उत्पन्न करना ।

२) छात्रों को सस्वर कविता वाचन का अभ्यास कराना ।

३) छात्रों में भावानुभूति तथा सौंदर्यानुभूति का विकास करना ।

४) छात्रों को ईष्ट देवता के प्रति भक्ति भावना उत्पन्न कराना।

२ विशिष्ट उद्देश्य :

) छात्र काव्य के भावों को बोधगम्य करके अपने शब्दों में प्रस्तुत कर सकेंगे ।

२) छात्र प्रिय भगवान के प्रति भक्ति से रहने का प्रयास करेंगे ।

३) छात्र भाव – सौंदर्य और शिल्प सौंदर्य को समझ सकेंगे ।

४) छात्र मीरा की अनन्य भक्ति भावना गोविंद  के प्रति ग्रहण कर सकेंगे ।

३ सहायक सामग्री :

निर्धारित पुस्तकें स्पर्श भाग २ तथा भक्त कवतत्रि मीराबाई का भाव चित्र , शामपट चाँक एंव चार्ट आदि ।

४ प्रस्तुतीकरण :

सर्वप्रथम विद्यार्थियों को मीराबाई का परिचय देते हुए उनके काव्य पाठ ’ पद ’ का भाव एंव व्याख्यान निम्नलिखित रुप से बताया जाएगा । 

                                      पद

हरि आप हरो जन री भीर।

द्रोपदी री लाज राखी, आप बढायो चीर ।

भगत कारण रूप नरहरि , धरयो आप सरीर ।

बूढतो गजराज राख्यो , काटी कुण्जर पीर ।

दासी मीराँ लाल गिरधर , हरो म्हारी भीर ।

व्याख्यान :

मीराबाई अपने प्रिय भगवान कृष्ण से कहती हैं – हे भगवान ! आप ही अपनी इस दासी की पीडा हरें । आपने ही अपमानित द्रोपदी की लाज बचाई थी । जब दु:शासन ने उसे निर्वस्त्र करने का प्रयास किया था। तो आपने ही उसे वस्त्र प्रदान किए थे । आप भक्तों पर कृपा करने वाले हैं । अपने प्रिय भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए नरसिंह रूप धारण किया था । आपने ही डुबते हुए हाथी की रक्षा की थी । उसे मगरमच्छ के मुँह से बचाया था । इस प्रकार आपने उस हाथी की पिडा दूर की थी । दास मीरा कहती हैं – हे गिरिधर लाल ! आप मेरी पीडा भी भव-बंधनों से छुटकारा दो ।                                                   

स्याम म्हाने चाकर राखे जी,गिरिधरी लाल म्हाँने चाकर राखोजी ।

चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ ।

बिन्दरावन री कुंज गली में , गोविन्द लीला गास्यूँ ।

चाकरी में दरसण पास्यूँ , सुमरण पास्यूँ खरची ।

भाव भगती जागीरी पास्यूँ , तीनू बाताँ सरसी ।

व्याख्यान :

मीरा अपने प्रिय भगवान कृष्ण से कहती है – हे श्याम ! मुझे अपनी दासी बना लो । हे गिरिधर लाल ! तुम मुझे अपनी नौकरानी के रूप में रख लो । मैं तुम्हारी सेविका के रूप में रहूँगी और तुम्हारे लिए बाग – बगीचे लगाऊँगी , जिसमें तुम विहार कर सको । इसी बहाने मैं रोज सुबह तुम्हारे दर्शन कर सकूँगी । मैं वृंदावन के कुंजों में और गलियों में कृष्ण की लीला के गाने गाऊँगी । इअस सेवा के बदले में मुझे प्रभु – दर्शन का अवसर मिलेगा । नाम – स्मरण रूपी जेब  - खर्च प्राप्त होगा । भावपूर्ण भक्ति की जागीर प्राप्त होगा । इस प्रकार दर्शन , स्मरण और भाव – भक्ति नामक तीनों बातें मेरे जीवन में रच – बस जाएँगी । 

 मोर मुगट पीताम्बर सौहे , गल वैजन्ती माला ।

बिन्दरावन में भेनु चरावे , मोहन मुरली वाला ।

उँचा उँचा महल बणाव , बिच बिच राखूँ बारी ।

साँवरिया रा दरसण पास्यूँ , पहर कुसुम्बी साडी ।

आधी रात प्रभु दरसण , दीज्यो जमनाजी रे तीरां ।

मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर , हिवडो घणो अधीराँ ॥ 

 व्याख्यान :

भगवान श्री कृष्ण के रूप – सौंदर्य का वर्णन करती मीरा कहती है कि मेरे प्रभु कृष्ण के माथे पर मोरपंखों का बना हुआ मुकुट सुशोभित है । तन पर पीले वस्त्र सुशोभित हैं । गले में वनफूलों की माला शोभायमान है । मेरा वह मोहन वृंदावन में गायें चराता है और मधुर मुरली बजाता है । वृंदावन में मेरे प्रभु का बहुत ऊँचा महल है । मैं उस महल के आँगन के बीच – बीच में सुंदर फूलों से सजी फुलवारी बनाऊँगी । फिर मैं स्वयं लाल रंग की साडी पहन्कर अपने साँवले प्रभु के दर्शन पाऊँगी । मीरा भगवान कृष्ण से निवेदन करती है कि हे प्रभु ! तुम आधी रात के समय मुझे यमुना जी के किनारे अपने दर्शन देने आना । हे गिरिधर ! हे चतुर – नटखट बालगंगाधर मेरा मन तुम से मिलने के लिए बहुत व्याकुल है । तुम मुझे आकर दर्शन अवश्य देना ।   

५ कठिन शब्दार्थ :

हरि = कृष्ण , हरो=दूर करो, चीर=वस्त्र, भगत=भक्त, गजराज=हाथी, चाकर=नौकर , खरची==जेब खर्च आदि।

६ विद्यार्थी – क्रियाएँ :

१) आदर्श वाचन को सुनकर तथा अनुकरण वाचन के द्वारा पद का अर्थ तथा भाव ग्रहण करेंगे ।

२) शामपट पर देखकर विभिन्न शब्दों के अर्थ तथा उदाहरण लिखेंगे ।

३) जिज्ञासा समाधान हेतु प्रश्न पूछ सकते है ।

४) दिए गए अभ्यास कार्य तथा गृहकार्य को पूर्ण करेंगे ।

५) मौखिक रुप से पद के भाव बता सकेंगे ।

७ मूल्यांकन :

१) मीरा के पद को मौखिक रुप से उसका भाव बोल पाएँगे ।

२) प्रश्न अभ्यास के प्रश्न पूछकर ।

३) कठिन शब्दों के अर्थ पूछकर ।

४) चक्र परीक्षा द्वारा ।

८ गृहकार्य :

मीराबाई की भक्ति भावना को अपने शब्दों में लिखिए ।                     

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