पाठ योजना
कक्षा : दसमं
दिनांक :१८ जुलाई २००७ से ३१ जुलाई २००७ तक
पाठ का नाम : तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र ।
शैक्षणिक उद्देश्य :-
१ सामान्य उद्देश्य :
१) छात्रों में गद्य पाठ के प्रति अभीरुचि उत्पन्न करना ।
२) छात्रों में विचाराभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना ।
३) छात्रों में शब्द भंडार में वृद्धि करना ।
४) विद्यार्थी के व्याकरणिक ज्ञान में गहनता और शुद्धता लाना ।
२ विशिष्ट उद्देश्य :
१) छात्रों को फिल्मी दुनिया के जगत के मनोभावना से परिचित कराना।
२) छात्रों को सेल्यूलाइड पर लिखी हुई कविता की भावना का विकास करना ।
३) छात्रों में प्राचीन फिल्म और आधुनिक फिल्म के अंतर को समझने की भावना को उत्पन्न कराना ।
४) छात्रों को तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र के संवेदनशिल और भावनात्मक मन से आवगत कराना ।
५) छात्रों को समास पद और अनेकार्थी शब्दों से आवगत कराना ।
३ सहायक सामग्री :
निर्धारित पुस्तकें स्पर्श भाग २ तथा पाठ को कंप्यूटर द्वारा फिल्म तीसरी कसम को दिखाना , शामपट चाँक एंव चार्ट आदि ।
४ प्रस्तुतीकरण :
प्रस्तुत पाठ में अध्यापक विद्यार्थियों को समझाते है कि तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र के जीवन और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया है । राजकपूर की फिल्मे:-संगम , मरा नाम जोकर , अजंता , मै और मेरा दोस्त सत्यमं शिवम और सुंदरम एवं तिसरी कसम फिल्मों का प्रदर्शित होना । तीसरी कसम की सफलता :- तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र की इस फिल्म को सेल्यूलाइड पर लिखा हुआ था । इस को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक , बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एशोशियन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म और मास्को फिल्म फेस्टिवल के पुरस्कार मिला है । इसी प्रकार शैलेंद्र – भावुक और आदर्श्वादी कवि , फिल्मों में साहित्य के रक्षक शैलेंद्र , शैलेंद्र कवि ह्रदय और राजकुमार हिरामन के रूप में अभिनय करने के हर एक विषय पर विस्तार रूप से जानकारी देना ।
५ कठिन शब्दार्थ :
गहन=गहरा , भूमिका=अभिनय , बगैर=बिना , अपार=असीम , संकेत= ईशारा अभाव= गरीबी आदि।
६ विद्यार्थी – क्रियाएँ :
१) आदर्श वाचन को सुनकर तथा अनुकरण वाचन के द्वारा तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र के पाठ का अर्थ ग्रहण करेंगे ।
२) शामपट पर देखकर विभिन्न शब्दों के अर्थ तथा पर्यावाची शब्दों के अर्थों के उदाहरण लिखेंगे ।
३) जिज्ञासा समाधान हेतु प्रश्न पूछ सकते है ।
४) दिए गए अभ्यास कार्य तथा गृहकार्य को पूर्ण करेंगे ।
५) गद्य पाठ को सप्रसंग द्वारा लिख सकेंगे ।
७ मूल्यांकन :
१) तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र के प्रश्नोंत्तर को मौखिक रूप द्वारा पूछकर ।
२) हिरामन की व्यक्तित्व के बारे में पूछकर ।
३) कठिन शब्दों के अर्थ पूछकर ।
४) चक्र परीक्षा द्वारा ।
५) लिखित गृह कार्य जाँच द्वारा ।
८ गृहकार्य :
चेहरा मुरझाना , चक्कर खा जाना , दो से चार बनना और आँखो से बोलना मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।